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Tuesday, 29 April 2014

Class 8 Hindi Vasant Chapter 3, बस की यात्रा

कारण बताएँ
प्रश्न १: "मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा|" लेखक के मन में हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा क्यों जग गई ?
उत्तर: लेखक के मन में बस कंपनी के हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा इसलिए जाग गई कि वह इतनी खटारा बस को चलाने का साहस जुटा रहा था| कंपनी का हिस्सेदार अपनी  पुरानी बस की खूब तारीफ़ कर रहा था| ऐसे व्यक्ति के प्रति श्रद्धा भाव ही उमड़ता है| 

प्रश्न २: "लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस शाम वाली बस से सफ़र नहीं करते|" लोगों ने यह सलाह क्यों दी ?
उत्तर: लोगों ने लेखक को यह सलाह इसलिए दी क्योंकि इस बस का कोई भरोसा नहीं है कि यह कब और कहाँ रूक जाए, शाम बीतते ही रात हो जाती है और रात  रास्ते में कहाँ बितानी पद जाए, कुछ पता नहीं रहता| उनके अनुसार यह बस डाकिन की तरह है| 

प्रश्न ३: "ऐसा जैसे सारी बस ही इंजन है और हम इंजन के भीतर बैठे हैं|" लेखक को ऐसा क्यों लगा ?
उत्तर: जब बस का इंजन स्टार्ट हुआ तब सारी बस झनझनाने लगी| लेखक को ऐसा प्रतीत हुआ कि पूरी बस ही इंजन है| मानो वह बस के भीतर न बैठकर इंजन के भीतर बैठा हुआ हो|    

प्रश्न ५: "मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था|" लेखक पेड़ों को अपना दुश्मन क्यों समझ था ?
उत्तर: लेखक को पेड़ों से दर लग रहा था कि कहीं उसकी बस किसी पेड़ से टकरा न जाए| एक पेड़ निकल जाने पर वह दूसरा पेड़ का इंतज़ार करता था कि बस कहीं इस पेड़ से न टकरा जाए | यही वजह है कि लेखक को हर पेड़ अपना दुश्मन लग रहा था | 

पाठ से आगे

प्रश्न १: 'सविनय अवग्यां आंदोलन' किसके नेतृत्व में, किस उद्देश्य से तथा कब हुआ था ? इतिहास की उपलब्ध त पुस्तकों के आधार पर लिखिए | 
उत्तर: 'सविनय अवग्यां आंदोलन' महात्मा गाँधी के नेतृत्व में १९३० में अंग्रेज़ी सरकार से असहयोग करने तथा स्वराज पारित के लिए किया गया था |       

प्रश्न २:  सविनय अवग्यां का उपयोग  व्यंग्यकार ने किस रूप में  किया है ? लिखिये।
उत्तर: 'सविनय अवग्यां आंदोलन' १९३० में में सरकारी आदेशों का पालन न करने के लिए किया था। इसमें अंग्रेज़ी सरकार के साथ  सहयोग न  करने की भावना थी । १२ मार्च १९३० को इसी कड़ी में दांडी मार्च किया गया । नमक कानून १९३० में तोड़ा गया । 
लेखक ने इसका उपयोग इस सन्दर्भ में किया है कि आन्दोलन के दौरान जिस प्रकार अंग्रेजों के दमन पूर्वक कार्यों से भारतीय जनता झुकी नहीं बल्की अपनी विनम्रपूर्वक संघर्ष को जारी रखा उसी प्रकार यह बस भी अपने खटारा और टूटी-फूटी होने के बावजूद चल रही है या कहें कि चलाई जा रही है । बस की ढाँचा जवाब दे  था, फिर भी वह चल रही थी ।

Class 8 Hindi Vasant Chapter 4, दीवानों की हस्ती

Question 1:
कवि ने अपने आने को 'उल्लास' और जाने को 'आँसू बनकर बह जाना' क्यों कहा है?
Answer :
कवि अपने आने को 'उल्लास' कहता है क्योंकि किसी भी नई जगह पर आने से उसे खुशी मिलती है तथा उस स्थान को छोड़कर जाते समय दुख होता है और इसीलिए आँखों से आँसू निकल जाते हैं। वह अन्य लोगों को खुशियाँ बाँटता है जिससे वे अपना दुख भूल जाते हैं। जब वह जाता है तो वह यह दुख लेकर जाता है कि ये खुशियाँ हमेशा के लिए नहीं हैं।
Question 2:
भिखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटानेवाला कवि ऐसा क्यों कहता है कि वह अपने हृदय पर असफलता का एक निशान भार की तरह लेकर जा रहा है? क्या वह निराश है या प्रसन्न है?
Answer :
यहाँ भिखमंगों की दुनिया से कवि का आशय है कि यह दुनिया केवल लेना जानती है देना नहीं। कवि ने भी इस दुनिया को प्यार दिया पर इसके बदले में उसे वह प्यार नहीं मिला जिसकी वह आशा करता है। कवि के लिए यह उसकी असफलता है। इसलिए वह अपने हृदय पर असफलता का एक निशान भार की तरह लेकर जा रहा है। अत: कवि निराश है, वह समझता है कि प्यार और खुशियाँ लोगों के जीवन में भरने में असफल रहा।
Question 3:
कविता में ऐसी कौन-सी बात है जो आपको सबसे अच्छी लगी?
Answer :
कविता में सबसे अच्छी बात कवि का जीवन को जीने का नज़रिया है। वह हर परिस्थिति में खुश रहना चाहता है और सबको प्यार देकर खुश रखना चाहता है। ऐसा व्यक्ति विषम परिस्थितियों में भी खुश रहना जानता है।


Question 1:
जीवन में मस्ती होनी चाहिए, लेकिन कब मस्ती हानिकारक हो सकती है? सहपाठियों के बीच चर्चा कीजिए।
Answer :
इस प्रश्न पर अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करें। जैसे − अगर मस्ती से हमको और दूसरों को कुछ भी थोड़ा बहुत फ़ायदा हो रहा है, कुछ अच्छा मिल रहा है तो मस्ती होनी चाहिए। परन्तु जब मस्ती से केवल नुकसान है तो मस्ती हानिकारक है अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी।
Question 1:
संतुष्टि के लिए कवि ने 'छककर' 'जी भरकर' और 'खुलकर' जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। इसी भाव को व्यक्त करनेवाले कुछ और शब्द सोचकर लिखिए, जैसे -हँसकर, गाकर।
Answer :
(i) प्यार लुटाकर
(ii) मुस्कराकर
(iii) देकर
(iv) मस्त होकर
(v) सराबोर होकर

Question 1:
• एक पंक्ति में कवि ने यह कहकर अपने अस्तित्व को नकारा है कि "हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले।" दूसरी पंक्ति में उसने यह कहकर अपने अस्तित्व को महत्त्व दिया है कि "मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले।" यह फाकामस्ती का उदाहरण है। अभाव में भी खुश रहना फाकामस्ती कही जाती है। कविता में इस प्रकार की अन्य पंक्तियाँ भी हैं उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कविता में परस्पर विरोधी बातें क्यों की गई हैं ?
Answer :
विरोधाभास वाली काव्य-पंक्तियाँ :-
(i) आए बनकर उल्लास अभी,
आँसू बनकर बह चले अभी।
(यहाँ उल्लास भी है और आँसू भी है) कवि सुख- दुख को समान भाव से लेता है।
(ii) हम भिखमंगों की दुनिया में,
स्वच्छंद लुटाकर प्यार चले।
(यहाँ भिखमंगों का उल्लेख है और लुटाना भी है) कवि दूसरों को प्यार व खुशियाँ देकर खुद बिना कुछ लिए चला जाता है।
(iii) हम स्वयं बँधे थे और स्वयं,
हम अपने बंधन तोड़ चले।
(यहाँ स्वयं बंधकर फिर स्वयं अपने बंधनो को तोड़ने की बात की गई है।)

Class 8 Hindi Vasant chapter 1 Dhwani ध्वनि

Question 1:
कवि को ऐसा विश्वास क्यों है कि उसका अंत अभी नहीं होगा?
Answer :
उसको विश्वास है कि अभी वो कमज़ोर नहीं है। अपितु उसके अंदर जीवन को जीने के लिए उत्साह, प्रेरणा व ऊर्जा कूट-कूट कर भरी है। एक मनुष्य तभी स्वयं का अंत मान लेता है जब वह अपने अंदर की ऊर्जा को क्षीण व उत्साह को कम कर देता है। प्रेरणा जीवन को ईंधन देने का कार्य करती है, जब ये ही न रहे तो मनुष्य का जीवन कैसा? परन्तु ये तीनों प्रचुर मात्रा में उसके पास हैं। तो कैसे वह स्वयं का अंत मान ले। इसलिए उसका विश्वास है कि वो अभी अंत की ओर जाने वाला नहीं है।
Question 2:
फूलों को अनंत तक विकसित करने के लिए कवि कौन-कौन-सा प्रयास करता है?
Answer :
फूलों को विकसित करने के लिए कवि उन कोमल कलियों को जो इस संसार से अनभिज्ञ हैं और सुप्त अवस्था में पड़ी हुई हैं, अपने कोमल स्पर्श से जागृत करने का प्रयास करता है ताकि वो निंद्रावस्था से जागकर एक मनोहारी सुबह के दर्शन कर सके। अर्थात्‌ उस युवा-पीढ़ी को निंद्रा से जगाने का प्रयास करता है जो अपने जीवन के प्रति सचेत न रहकर अपना मूल्यवान समय व्यर्थ कर रही है और वो ये सब अपनी कविता के माध्यम से करना चाहता है।
Question 3:
कवि पुष्पों की तंद्रा और आलस्य दूर हटाने के लिए क्या करना चाहता है?
Answer :
पुष्पों की तंद्रा व आलस को हटाने के लिए कवि अपने स्पर्श से उन्हें जगाने का प्रयास करता है। जिस तरह वसंत आने पर उसके मधुर स्पर्श से फूल और कलियाँ खिल जाती हैं उसी तरह कवि भी प्रयत्नशील है।
Question 1:
कविता की निम्नलिखित पंक्तियाँ पढ़कर बताइए कि इनमें किस ऋतु का वर्णन है।
फूटे हैं आमों में बौर
भौंर वन-वन टूटे हैं।
होली मची ठौर-ठौर
सभी बंधन छूट जाते हैं।
Answer :
इस कविता में वसंत ऋतु का ही वर्णन है। यहाँ आम के बौर और होली के त्योहार का वर्णन है।



Question 2:
स्वप्न भरे कोमल-कोमल हाथों को अलसाई कलियों पर फेरते हुए कवि कलियों को प्रभात के आने का संदेश देता है, उन्हें जगाना चाहता है और खुशी-खुशी अपने जीवन के अमृत से उन्हें सींचकर हरा-भरा करना चाहता है। फूलों-पौधों के लिए आप क्या-क्या करना चाहेंगे?
Answer :
हम फूलों-पौधों को अधिक संख्या में उगाएँगे, उनकी देखभाल करेंगे और समय- समय पर खाद, पानी की सिंचाई आदि की व्यवस्था करेंगे, फूल-पौधों को जंगली जानवर और बेकार तोड़ने वालों से बचाएँगे।

Question 1:
बसंत को ऋतुराज क्यों कहा जाता है? आपस में चर्चा कीजिए।
Answer :
हमारे देश में छ: ऋतुएँ होती हैं - सर्दी, गर्मी, वर्षा, वसंत, पतझड़। इसमें वसंत को ऋतुराज कहते हैं क्योंकि इस ऋतु में न अधिक सर्दी पड़ती है और न अधिक गर्मी। अंग्रेज़ी महीने के अनुसार ये मार्च-अप्रैल में होती है। इसमें वसंत पंचमी, नानक त्योहार आता है, पीली-सरसों खिलती है, पेड़ों पर नए पत्ते नई कोपल आती है, आम के बौर भी लगते हैं। ये सभी के लिए स्वास्थयवर्धक भी होती है इसलिए इसे ऋतुराज कहते हैं।
Question 2:
वसंत ऋतु में आने वाले त्योहारों के विषय में जानकारी एकत्र कीजिए और किसी एक त्योहार पर निबंध लिखिए।
Answer :
वसंत ऋतु कुल दो महीने से कुछ अधिक रहती है यह आधे फाल्गुन से शुरू होकर चैत बैसाख के कुछ दिनों तक रहती है। अत: इस ऋतु में मस्तीभरी होली रंगो का त्योहार, वसंत पंचमी, देवी सरस्वती की पूजा, खेती में पकी फसल और पीली सरसों का रंग, बैसाखी आदि त्योहार मनाए जाते हैं।
वसंत ऋतु
भारत को प्राकृतिक सौदर्य से पूर्ण करने में ऋतुओं का विशेष योगदान है। यहाँ की ऋतुओं में वसंत ऋतु सबसे प्रमुख है। यह फाल्गुन व चैत में शुरू होती है, चारों और उल्लास और आनंद का वातावरण होता है। उत्तर भारत व बंगाल में देवी सरस्वती की पूजा की जाती है, पीले वस्त्र पहनते है, पीला पकवान फी बनाया जाता है। क्योंकि सरसों की पीली फसल लहलहा उठते हैं। मानो धरती ने पीली चादर ओढ़ ली है। यह एक सामाजिक त्योहार भी है क्योंकि इस पर लगे मेलों में मित्रों सगे सम्बन्धियों में मेलजोल बढ़ता है। कुछ लोग आज से ही अपने बच्चों की पढ़ाई शुरू करते हैं। रंग बिरंगे फूल खिलते हैं फूलों पर भँवरे, तितलियाँ मँडराती प्रकृति के सौदंर्य में चार चाँद लगाती है। प्रात: कालीन भ्रमण तो अनूठा आनंद देता है। वसंत ऋतु को मधु ऋतु भी कहते हैं। लोक गीतों की मधुरता और प्राकृतिक सौदंर्य भाव शून्य कर देता है।
आया ऋतुराज वसंत, शीत का हुआ अंत,
बागों में हरियाली छाई, प्रकृति मन मोहने आई,
झूम रहे हैं दिग् दिगंत, छा रहा है आनंद अनंत।
Question 3:
"ऋतु परिवर्तन का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है"- इस कथन की पुष्टि आप किन-किन बातों से कर सकते हैं? लिखिए।
Answer :
ऋतु परिवर्तन का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है - उसके खानपान, उसके पहनावे, उस समय के त्योहार, उनका स्वास्थय पर प्रभाव। अत: जैसी ऋतु होगी उपरोक्त बातें भी उसी के अनुसार होंगी।

Question 1:
'हरे-हरे', 'पुष्प-पुष्प' में एक शब्द की एक ही अर्थ में पुनरावृत्ति हुई है। कविता के 'हरे-हरे ये पात' वाक्यांश में 'हरे-हरे' शब्द युग्म पत्तों के लिए विशेषण के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। यहाँ 'पात' शब्द बहुवचन में प्रयुक्त है। ऐसा प्रयोग भी होता है जब कर्ता या विशेष्य एक वचन में हो और कर्म या क्रिया या विशेषण बहुवचन में; जैसे- वह लंबी-चौड़ी बातें करने लगा। कविता में एक ही शब्द का एक से अधिक अर्थों में भी प्रयोग होता है-''तीन बेर खाती ते वे तीन बेर खाती है।'' जो तीन बार खाती थी वह तीन बेर खाने लगी है। एक शब्द 'बेर' का दो अर्थों मे प्रयोग करने से वाक्य में चमत्कार आ गया। इसे यमक अलंकार कहा जाता है। कभी-कभी उच्चारण की समानता से शब्दों की पुनरावृत्ति का आभास होता है जबकि दोनों दो प्रकार के शब्द होते हैं; जैसे- मन का मनका।
ऐसे वाक्यों को एकत्र कीजिए जिनमें एक ही शब्द की पुनरावृत्ति हो। ऐसे प्रयोगों को ध्यान से देखिए और निम्नलिखित पुनरावृत शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए बातों-बातों में, रह-रहकर, लाल-लाल, सुबह-सुबह, रातों-रात, घड़ी-घड़ी।
Answer :
(1) बातों-बातों - बातों-बातों मे हम दोनों ने रास्ता पार कर लिया।
(2) रह-रहकर  - मुझे रह-रहकर अपनी स्वर्गवासी दादी की याद आती है।
(3) लाल-लाल  - सोनू के पास गुलाब के लाल-लाल फुल हैं।
(4) सुबह-सुबह  - मेरी दादी सुबह-सुबह हरे राम हरे राम, राम-राम हरे-हरे का जाप करती हैं।
(5) रातों-रात  - चोर रातों-रात घर का सामान लेकर चंपत हो गए।
(6) घड़ी-घड़ी  - तुम घड़ी-घड़ी दरवाज़े पर क्या देखते हो।

Question 2:
'कोमल गात, मृदुल वसंत, हरे-हरे ये पात'
विशेषण जिस संज्ञा (या सर्वनाम) की विशेषता बताता है, उसे विशेष्य कहते हैं। ऊपर दिए गए वाक्यांशों में गात, वसंत और पात शब्द विशेष्य हैं, क्योंकि इनकी विशेषता (विशेषण) क्रमश: कोमल, मृदुल और हरे-हरे शब्द बता रहे है।
हिंदी विशेषणों के सामान्यतया चार प्रकार माने गए है-गुणवाचक विशेषण, परिमाणवाचक विशेषण, संख्यावाचक विशेषण और सार्वनामिक विशेषण।
Answer :
(i) गुणवाचक विशेषण :- अच्छा बंदर, सुन्दर कार
(ii) परिमाणवाचक विशेषण :- दो गज ज़मीन, चार किलो गेहूँ
(iii) संख्यावाचक विशेषण :- चार संतरे, प्रथम स्थान
(iv) सार्वनामिक विशेषण :- यह लाल फूल है, वह तेरी फ्राक है


Class 8 Hindi Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ


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Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ
Question 1:
बचपन में लेखक अपने मामा के गाँव चाव से क्यों जाता था और बदलू को 'बदलू मामा' न कहकर 'बदलू काका' क्यों कहता था?
Answer :
लेखक के मामा के गाँव में लाख की चूड़ियाँ बनाने वाला कारीगर बदलू रहा करता था। वो लाख की बहुत सुन्दर चुड़ियाँ बनता था। परन्तु लेखक के लिए वह लाख की रंग बिंरगी सुन्दर गोलियाँ बनाकर दिया करता। जिसके कारण लेखक सदैव बदलू के पास जाता और यही कारण है कि लेखक को उसके मामा का गाँव भाता था।
बदलू को समस्त गाँव ही बदलू काका कहकर बुलाया करता था। इसलिए लेखक ने भी उनको काका कहना ही उचित समझा। बदलू उन्हें आम खाने को देता, मलाई खाने को देता।
Question 1:
बदलू को किसी बात से चिढ़ थी तो काँच की चूड़ियों से' और बदलू स्वयं कहता है - जो सुंदरता काँच की चूड़ियों में होती है लाख में कहाँ संभव है?'' ये पंक्तियाँ बदलू की दो प्रकार की मनोदशाओं को सामने लाती हैं। दूसरी पंक्ति में उसके मन की पीड़ा है। उसमें व्यंग्य भी है। हारे हुए मन से, या दुखी मन से अथवा व्यंग्य में बोले गए वाक्यों के अर्थ सामान्य नहीं होते। कुछ व्यंग्य वाक्यों को ध्यानपूर्वक समझकर एकत्र कीजिए और उनके भीतरी अर्थ की व्याख्या करके लिखिए।
Answer :
(1) बदलू ने मेरी दृष्टि देख ली और बोल पड़ा, यही आखिरी जोड़ा बनाया था ज़मींदार साहब की बेटी के विवाह पर, दस आने पैसे मुझको दे रहे थे। मैंने जोड़ा नहीं दिया। कहा, शहर से ले आओ।
इस कथन में उसके ज़मींदार पर व्यंग्य करना है। जिस बदलू की चूड़ियों की धूम सारे गाँव में नहीं अपितु आस पास के गाँवों में भी थी, लोग शादी-विवाह पर उसको मुहँ माँगें मूल्य दिया करते थे, ज़मींदार उसे दस आने देकर सन्तुष्ट करना चाहते थे। दूसरा व्यंग्य उसने शहर पर किया है । ज़मींदार के द्वारा उसको सिर्फ़ दस आने देने पर उसने जमींदार को चूड़ियाँ शहर से लाने के लिए कह दिया क्योंकि शहर की चूड़ियों का मूल्य उसकी चूड़ियों से सहस्त्र गुना महँगा था।
(2) आजकल सब काम मशीन से होता है खेत भी मशीन से जोते जाते हैं और फिर जो सुंदरता काँच की चूड़ियों में होती है, लाख में कहाँ संभव है?
यहाँ पर प्रथम व्यंग्य बदलू ने मशीनों पर किया है, दूसरा व्यंग्य काँच की चूड़ियों पर। उसके अनुसार अब तो खेतों का सारा काम मशीनों से हो जाता है। आदमियों की ज़रूरत क्या है और दूसरा काँच की चूड़ियों पर कि काँच की चूड़ियाँ दिखने में इतनी सुन्दर होती है कि लाख की चूड़ियाँ भी इनके आगे फीकी लगती हैं। अर्थात्‌ सुन्दरता के आगे दूसरी वस्तु की गुणवत्ता का कोई मूल्य नहीं है।
Question 2:
वस्तु-विनिमय क्या है? विनिमय की प्रचलित पद्धति क्या है?
Answer :
वस्तु विनिमय से तात्पर्य लेन-देन के लिए रूपए-पैसों के स्थान पर एक वस्तु का दूसरी वस्तु से क्रय-विक्रय करना है। जिस तरह से बदलू लाख की चूड़ियों के स्थान पर अनाज व कपड़े लिया करता था। वस्तु विनिमय की पद्धति गावों में प्रचलित है। यहाँ लोग अन्न के बदले अन्य किसी भी (खाने पीने व कपड़े) वस्तु से आदान-प्रदान कर लेते हैं। इस समय इस पद्धति का स्थान रूपए-पैसों ने ले लिया है।
Question 3:
'मशीनी युग ने कितने हाथ काट दिए हैं।'- इस पंक्ति में लेखक ने किस व्यथा की ओर संकेत किया है?
Answer :
लेखक ने उन कारीगरों की तरफ़ संकेत किया है जो हाथ से बनी वस्तुओं से अपना जीवनयापन करते हैं। आज के मशीनी युग ने उन कारीगरों के हाथ काटकर मानों उनकी रोटी ही छीन ली है। उन कारीगरों का रोजगार इन पैतृक काम धन्धों से ही चलता था। उसके अलावा उन्होंने कभी कुछ नहीं सीखा था। वे पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी इस कला को बढ़ाते चले आ रहे हैं और साथ में रोज़ी रोटी भी चला रहें हैं। परन्तु मशीनी युग ने जहाँ उनकी रोज़ी रोटी पर वार किया है, वही दूसरी ओर इन बेशकीमती कलाओं का अंत भी किया है। ऐसी अनगिनत कलाएँ हैं जो लुप्त अवस्था में हैं और इनको करने वाले कारीगर इस युग के अंधकार में खो रहे हैं। यही वो व्यथा है जो लेखक व्यक्त करना चाहता है। ऐसे कारीगर कला होने पर भी बेकार हो गए और उनकी रोज़ी रोटी भी खत्म हो गई।
Question 4:
बदलू के मन में ऐसी कौन-सी व्यथा थी जो लेखक से छिपी न रह सकी।
Answer :
लेखक के अनुसार बदलू उसके मामा के गाँव में लाख की चूड़ियों का श्रेष्ठ कारीगर था। उसके गाँव के अलावा बाहर गाँव में भी उसकी लाख की चूड़ियाँ खासी प्रचलित थी, विवाह में भी उसकी चूड़ियाँ प्रचलित थी। परन्तु जैसे-जैसे काँच की चूड़ियों का प्रचलन बढ़ने लगा। उसकी लाख की चूड़ियों का मूल्य घटना आरम्भ हो गया। नतीजन एक दिन इन लाख की चूड़ियों का स्थान काँच की चूड़ियों ने ले लिया और बदलू की लाख की चूड़ियों का व्यवसाय का अन्त हो गया। अब कोई भी उसकी चूड़ियाँ नहीं पहनता था। सबको काँच की चूड़ियाँ भाने लगी थी। उसके व्यवसाय की यह दुर्दशा बदलू को अन्दर ही अन्दर कचौटती थी परन्तु अपनी इस वेदना को वह किसी को प्रकट नहीं करता था। लेखक उसके हृदय की इस वेदना को भली-भांति समझता था क्योंकि लेखक ने अपने बचपन का एक लम्बा वक्त बदलू के साथ व्यतीत किया था। इस कारण उसके लिए बदलू की मन की दशा को समझना ज़्यादा आसान था।
Question 5:
मशीनी युग से बदलू के जीवन में क्या बदलाव आया?
Answer :
मशीनी युग के कारण उसका सारा व्यवसाय चौपट हो गया। उसने इस लाख की चूड़ियों के अलावा कभी और कुछ सीखा ही नहीं था। जिसके कारण वह बेरोज़गार हो गया। अब वह कमज़ोर व बीमार हो गया था। उसकी बेबसी लेखक को उसके चेहरे पर दिखाई देने लगी थी। जिसने उसे एक बूढ़ा व बीमार व्यक्ति बना दिया था।
Question 3:
मशीनी युग में अनेक परिवर्तन आए दिन होते रहते हैं। आप अपने आस-पास से इस प्रकार के किसी परिवर्तन का उदाहरण चुनिए और उसके बारे में लिखो।
Answer :
मशीनी युग के परिवर्तन का एक अच्छा उदाहरण कृषि है। पहले किसान हर काम हाथ से ही किया करते थे। कुछ कार्यों के लिए बैलों का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन आजकल हर काम मशीन से होता है। इससे छोटे मज़दूर बेकार हो गए, उन्हें अपनी रोज़ी कमाने शहर आना पड़ा।
Question 2:
'बदलू' कहानी में दृष्टि से पात्र है और भाषा की बात (व्याकरण) की दृष्टि से संज्ञा है। किसी भी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, विचार अथवा भाव को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा को तीन भेदों में बाँटा गया है () व्यक्तिवाचक संज्ञा, जैसे-शहर, गाँव, पतली-मोटी, गोल, चिकना इत्यादि () जातिवाचक संज्ञा, जैसे-चरित्र, स्वभाव, वजन, आकार आदि द्वारा जानी जाने वाली संज्ञा। () भाववाचक संज्ञा, जैसे-सुंदरता, नाजुक, प्रसन्नता इत्यादि जिसमें कोई व्यक्ति नहीं है और न आकार, वजन। परंतु उसका अनुभव होता है। पाठ से तीनों प्रकार की संज्ञाएँ चुनकर लिखिए।
Answer :
(क) व्यक्तिवाचक संज्ञा -
जमींदार, मामा, बदलू।
(ख) जातिवाचक संज्ञा -
स्त्रियाँ, चारपाई, बेटी, बच्चे, चूड़ियाँ।
(ग) भाववाचक संज्ञा -
बीमार, बेरोजगार, प्रसन्नता, व्यक्तित्व, शांति, पढ़ाई।






Question 3:
गाँव की बोली में कई शब्दों के उच्चारण बदल जाते हैं। कहानी में बदलू वक्त (समय) को बखत, उम्र (वय/आयु) को उमर कहता है। इस तरह के अन्य शब्दों को खोजिए जिनके रूप में परिवर्तन हुआ हो, अर्थ में नहीं।
Answer :
उम्र- उमर
मर्द - मरद
भैया - भइया
ग्राम - गाँव
अंबा - अम्मा
दुर्बल - दुबला
1. लाख की चूड़ियाँ पहने, तो मोच आ जाए।
अर्थ − लाख की चूड़ियाँ काँच की चूड़ियों से भारी होती है। शायद अब औरतें लाख की चूड़ियों का भार न सह सके।
2. मशीनी युग है न, लला! आजकल सब काम मशीन से होता है।
अर्थ − अब मशीन का युग है। हर काम मशीन से होता है। इससे किसके जीवन पर क्या असर पड़ता है इसकी किसी को कोई चिंता नहीं है।
3. गाय कहाँ है लला! दो साल हुए बेच दी। कहाँ से खिलाता?
अर्थ − अब काँच को चूड़िया बनने के बाद कोई भी लाख की चूड़िया खरीदना पंसद नहीं करता था क्योंकि वे काँच से महँगी थी। इससे बदलू की आर्थिक स्थिति खराब हो गई उसे खुद के खाने के लिए नहीं था गाय को कैसे खिलाता।